हिंदू पंचांग में पौष अमावस्या का बहुत अधिक महत्व है. पौष मास की अमावस्या का बड़ा महत्व है. क्योंकि कई धार्मिक कार्य अमावस्या पर किये जाते हैं. पितरों की आत्मा की शांति के लिए इस दिन तर्पण व श्राद्ध किया जाता है. वहीं पितृ दोष और कालसर्प दोष से मुक्ति के लिए इस दिन उपवास रखा जाता है. पौष माह में सूर्यदेव की उपासना का विशेष महत्व है. मान्यता है कि पौष मास में सूर्य की पूजा करने से सभी कष्ट मिट जाते हैं और घर में अपार खुशियां आती हैं पौष के महीने में सूर्यदेव के भग स्वरूप की पूजा करने का विधान है. ऐश्वर्य, धर्म, यश, श्री, ज्ञान और वैराग्य से परिपूर्ण सूर्यदेव (Surya Dev) का भग स्वरूप साक्षात परब्रह्म का ही रूप माना जाता है. ऐसे में आज हम आपको पौष अमावस्या (Paush Amavasya 2022) के दिन सूर्यदेव की पूजा किस तरह करनी चाहिए ये बताने जा रहे हैं.
पौष अमावस्या के दिन इस तरह करें सूर्यदेव की पूजा
– पौष अमावस्या के दिन तांबे के बर्तन में शुद्ध जल, लाल चंदन और लाल रंग के फूल डालकर सूर्यदेव को जल अर्पित करें. अर्घ्य सुबह के समय जितना जल्दी दिया जाए, उतना प्रभावी होता है.
– पौष अमावस्या के दिन गायत्री मंत्र का जाप करें. इससे कुंडली में सूर्य की स्थिति मजबूत होती है.
– पौष अमावस्या के दिन व्रत रखना काफी अच्छा माना जाता है. इस दिन खाने में नमक का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए. साथ ही सूर्यदेव को तिल और चावल का भोग लगाना चाहिए.
– इस दिन स्नान करते समय पानी थोड़ा सा गंगाजल मिलाकर नहाएं. साथ ही गुड़, लाल मसूर, तांबा, तिल का दान जरूर करें.
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